गायत्री ने लक्ष्मी को ऑनलाइन होने यानी इंटरनेट से जुड़ने का तरीका बताया. यह सीखने के बाद लक्ष्मी, जो सिलाई-कढ़ाई करती हैं, इंटरनेट पर साड़ी-ब्लाउज़ और बैग की नई-नई डिज़ाइन ढूंढने में लगी रहती हैं. ऑनलाइन होने से उनमें एक नया जोश आ गया है और हमेशा नई तकनीकें भी मिलती हैं जो आज काम में नाम करने के लिए चाहिए. अब वह अपने काम के अधिक दाम मांगती हैं. इन पैसों से लक्ष्मी के लिए आगे पढ़ना आसान हो गया है. और वह अपनी मां की मदद भी करती हैं. हाल ही में लक्ष्मी ने अपने लिए सोने की एक अंगूठी भी बनवाई है. अब लक्ष्मी इलाके की निरक्षर, अनपढ़ महिलाओं को कोई भी जानकारी बोल कर खोजना सिखाती हैं. इससे साड़ी की डिज़ाइन से लेकर पेट दर्द के इलाज तक दुनिया भर की उपयोगी जानकारी आसानी से मिलती है. एक पड़ोसन की एड़ियां फट गईं तो लक्ष्मी ने इसका हल भी ऑनलाइन ढूंढ निकाला. पड़ोसी की नजर में लक्ष्मी की इज़्ज़त बढ़ गई क्योंकि उसे हर दिन बहुत दूर जाना पड़ता और उसकी फटी ऐड़ियों से खून भी रिसता था. अब किसी समस्या का हल चाहिए तो बस पूछने भर की देर है.

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